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A dedication to a Friend :)

जो सजाये है मोहब्बत के आशियाने
वोह सीने में एक बड़ा दिल सजाये रखते है
कहते कुछ नही कभी जुबान से मगर
सब के लिए दिल के दरवाजे खुले रखते है

औरो की खुशी के लिए छुपा लेते सचाई
और दुश्मनो को भी माफ़ किया करते है
दिखता है खुली आँखों से वोह भी सब
पर औरो को हसी दे खुदको जलाया करते है

अब तो बन गए है वोह मेरी प्रेरणा
मुझे अक्सर मेरी पहचान कराया करते है
सादगी है उनकी आँखों में, उनकी बातो मा
जाने अनजाने मुझे अक्सर रुजाया करते है

कैसे करू मैं शुकर ऐ गुजार उनका
वोह हर मजिल मेरा साथ निभाया करते है
ख़बर नही है उनको की हम उनके कायल है
वोह मुझसे ख्वाबो में मिलने आया करते है

हम तो बाला दोस्ती के काबिल नही उनके “दिव्या”
वोह थो ख़ुद हसकर , मुझे हँसाया करते है

Divya

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November 2, 2009 at 9:05 am 2 comments


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