A dedication to a Friend :)
November 2, 2009
जो सजाये है मोहब्बत के आशियाने
वोह सीने में एक बड़ा दिल सजाये रखते है
कहते कुछ नही कभी जुबान से मगर
सब के लिए दिल के दरवाजे खुले रखते है
औरो की खुशी के लिए छुपा लेते सचाई
और दुश्मनो को भी माफ़ किया करते है
दिखता है खुली आँखों से वोह भी सब
पर औरो को हसी दे खुदको जलाया करते है
अब तो बन गए है वोह मेरी प्रेरणा
मुझे अक्सर मेरी पहचान कराया करते है
सादगी है उनकी आँखों में, उनकी बातो मा
जाने अनजाने मुझे अक्सर रुजाया करते है
कैसे करू मैं शुकर ऐ गुजार उनका
वोह हर मजिल मेरा साथ निभाया करते है
ख़बर नही है उनको की हम उनके कायल है
वोह मुझसे ख्वाबो में मिलने आया करते है
हम तो बाला दोस्ती के काबिल नही उनके “दिव्या”
वोह थो ख़ुद हसकर , मुझे हँसाया करते है
Divya
Entry Filed under: shayri e dost. Tags: yoindia.
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1.
Giriwar Sharma | November 6, 2009 at 6:56 pm
a fine depiction of the emotions.
2.
Divya | November 10, 2009 at 3:09 pm
Thanks a lot Mr. Sharma